Bipolar Disorder होने पर सिर्फ सेलेना गोम्स को ही नहीं, आपको भी होना चाहिए चिंतित। जानिए क्यों?

एक गलत धारणा है कि Bipolar Disorder (द्विध्रुवी विकार) की स्थिति से संबंधित दवा बच्चे के लिए हानिकारक है या इसके परिणामस्वरूप बांझपन हो सकता है। गुंजन आईवीएफ वर्ल्ड ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ गुंजन गुप्ता गोविल कहते हैं की bipolar Disorder (द्विध्रुवी विकार) की दवाओं पर मां को हर कदम पर एक विशेषज्ञ की मदद से जन्म प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।






अमेरिकी सिंगर "Selena Gomez" को अपने Bipolar Disorder के कारण से  उन्हें गर्भ धारण करने और माँ बनने की चिंता है की कही उसकी दवा उनके होने वाले बच्चे में कोई साइड इफेक्ट्स ना कर दे, लेकिन Bipolar Disorder से ग्रसित लोग दुनिया भर में बच्चे पैदा कर रहे हैं। और जानकारों की माने तो बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित महिला सही मार्गदर्शन और निगरानी से मां बन सकती है।


"भारत में द्विध्रुवी विकार (Bipolar Disorder) के मामलों में वृद्धि के साथ साथ जनता के बीच यह गलत धारणा भी बन गई है कि इससे संबंधित दवाएं गर्भावस्था में बच्चे के लिए हानिकारक हैं या इसके परिणामस्वरूप बांझपन हो सकता है या बच्चे के गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। 


हालांकि बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित कोई भी महिला गर्भवती हो सकती है, भले ही रोगी को द्विध्रुवी विकार का उपचार दिया जा रहा हो और इसके लिए दवा ले रहा हो। बच्चे और मां को हर कदम पर एक विशेषज्ञ की मदद की जरूरत होती है। उसी से जन्म प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। और यह कहना हैं  "डॉ गुंजन गुप्ता गोविल" का को की इस समय गुंजन आईवीएफ वर्ल्ड ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष हैं।


उसके पास कई ऐसे मरीज हैं जिन्होंने एंटी-साइकोटिक दवाएं लेने के बावजूद सफलतापूर्वक बच्चों को जन्म दिया है। उनमें से कुछ ने आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रियाओं के लिए भी उनसे संपर्क किया है। अनिवार्य रूप से इस तरह के case में एक अनुशासनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जहां मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, स्त्री रोग विशेषज्ञ और किसी अन्य विशेष चिकित्सक के परामर्श से मां की स्वास्थ्य स्थिति का आंकलन किया जााता हैं।



एंटी-साइकोटिक दवाएं कितनी हानिकारक हैं? 

मशहूर हस्तियों द्वारा तथा सामान्य लोगो के साथ समस्या यह है कि लोग चिकित्सा तर्क के बजाय जल्दी से उन पर विश्वास करना शुरू कर देते हैं जिनका इन सब पर जानकारी से कोई वास्ता नहीं होता है। 

लोगों को यह जानने की जरूरत है कि नई पीढ़ी की एंटी-साइकोटिक दवाएं पहले इस्तेमाल की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित हैं। लिथियम का उपयोग आजकल बहुत कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य के professionals या Doctors आमतौर पर उन महिलाओं पर इसके उपयोग को सीमित करने की कोशिश करते हैं जो मां बनना चाहती हैं। नई पीढ़ी की इन दवाओं ने बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रही माताओं से पैदा हुए बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। फिर भी, यदि विकृति की कोई बाहरी संभावना है, तो हम संरचनात्मक असामान्यताओं के लिए विशेष स्कैन और आनुवंशिक स्कैन के साथ शिशुओं की निगरानी कर सकते हैं। 


डॉ गोविल के अनुसार, यदि किसी महिला का मानसिक विकार या बीमारी स्थिर है तो वह पहली तिमाही में दवा लेना बंद कर सकती है, तो इसके लिए हमे चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यहां तक ​​कि अगर वह दूसरी तिमाही से अपनी दवा फिर से शुरू करती है, तो बच्चा सुरक्षित है क्योंकि तब तक ज्यादातर अंग बन चुके होते हैं। 


वास्तव में, pubmed.gov में प्रकाशित 2015 का एक शोध पत्र कहता है, "गर्भावस्था के दौरान गंभीर मानसिक बीमारियों का इलाज न करने के संभावित नुकसान को देखते हुए, गंभीर मानसिक विकारों से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए एंटी-साइकोटिक्स के सावधानीपूर्वक प्रशासन की सिफारिश की जाती है।


गर्भावस्था में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली एंटीसाइकोटिक्स ओलानज़ापाइन, रिसपेरीडोन और क्वेटियापाइन हैं, और यह भ्रूण के जन्मजात नुकसान का कारण नहीं बनती हैं। इन दवाओं से संबंधित भ्रूण के अंग या अंग विकृति के कोई विशिष्ट पैटर्न की सूचना नहीं मिली है।







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